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राम से बड़ा राम का नाम

by CKadmin

एक बार श्री राम ने दरबार लगाया उस में दूर दूर से राजाओं, महाराजाओं, ऋषिओं और महाऋषिओं को
बुलाया। एक राजा राजकंवर दरबार में प्रवेश कर ही रहा था कि उसको देवऋषि नारद ने रुका और बोला
राजन दरबार में जा कर सब को प्रणाम करना परन्तु ऋषि विश्वामित्र को प्रणाम मत करना क्योंकि वो ब्राह्मण
नहीं है वो क्षत्रिय है, और क्षत्रिय का क्षत्रिय को प्रणाम करना उचित नहीं। राजा ने ऐसा ही किया सभी को
प्रणाम किया पर विश्वामित्र को प्रणाम नहीं किया जिस से विश्वामित्र क्रोधित हो गए और श्री राम से राजा को
प्राण दंड देने की माँग की, राजा यह बात सुन कर भाग खड़ा हुआ और नारद जी से बोला की उनके प्राणों की
रक्षा करे। नारद जी ने बोला तुम हनुमान जी की माता अंजनी से प्रार्थना करो वो ही तुम्हरी रक्षा करेंगी। राजा
अंजनी माता के पास जा कर रक्षा की प्रार्थना करने लगा, माता ने राजा के प्राण की रक्षा का वादा कर दिया।
शाम को जब हनुमान जी घर आये तो अंजनी माँ ने हनुमान जी को बोला की मैंने इस राजा के प्राण रक्षा का
वादा किया हैं। हनुमान जी ने पूछा की किस राजा से रक्षा करनी है तब राजा ने श्री राम का नाम बताया। अब
संकट मोचन हनुमान खुद संकट में फंस गए, की अपने प्रभु श्री राम से कैसे युद्ध करेंगें। रात भर वो सोचते रहे,
सुबह उठते ही हनुमान जी राजन को सरयू नदी ले गए और कान में कुछ बोला और खुद सूक्ष्म रूप में राजन के
पीछे छुप गए। थोड़ी देर में श्री राम, राम बाण ले कर राजा के प्राण दंड देने आये। श्री राम को देखते ही राजन
नाच-नाच कर गाने लगा “रघुपति राघव राजा राम”। श्री राम ने देखा की यह तो उनका भक्त है उस का वध
कैसे करें, वो वापस महल आ गए। विश्वामित्र जी ने श्री राम पर क्रोध किया जिस से वो वापस शक्ति बाण ले कर
राजन के वध को चल पड़े। यहाँ हनुमान जी ने राजन के कान में फिर कुछ बोला, जैसे ही श्री राम आये राजन
नाच-नाच कर गाने लगा “जय जय सिया राम”। श्री राम ने बोला यह तो अब सीता का भक्त बन गया इस का
वध कैसे करू, और वो वापस चले गए। अब विश्वामित्र जी क्रोध से भर गए और श्री राम को ही श्राप देने लगें।
श्री राम ने माफ़ी मांगी और शक्ति बाण ले कर राजन को मारने निकल पड़े। हनुमान जी भी कहा कम थे उन्होंने
राजन के कान में फिर एक मंत्र पढ़ा। जैसे ही श्री राम ने बाण साधा, राजन नाच-नाच कर गाने लगा “जय सिया
राम, जय हनुमान” अब श्री राम संकट में फंस गए की हनुमान मेरा भक्त है और यह राजा हनुमान का भक्त है मैं
इसका वध कैसे करू। प्रातः से श्री राम की दौड़ देख कर ऋषि वशिष्ठ जी ने ऋषि विश्वामित्र को समझाया और
उनका क्रोध शांत किया। तब नारद जी ने बोला सतयुग ख़त्म होने वाला है भगवान राम के दर्शन सब को हो रहे
है कलयुग में श्री राम के दर्शन किसी को नहीं होगा, इस लीला से मैं यह समझाना चाहता था की राम अपने
नाम से नहीं जीत सकते और कलयुग में राम नाम ही सब को भाव सागर से पार लगाएगा इसलिए कहते है राम
से बड़ा है राम का नाम।

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