Home ज्योतिष ज्ञानवैदिक ज्योतिष एक रहस्यमयी ग्रह केतू

एक रहस्यमयी ग्रह केतू

by CKadmin

हालाँकि ज्योतिषशास्त्र में केतू को एक अशुभ ग्रह की संज्ञा दी जाती है, परन्तु ऐसा नहीं है कि केतू केवल बुरे फल ही देता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार केतू राहू नामक दैत्य के नीचे का हिस्सा है।

समुंद्र मंथन की कथा के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने राहू नामक दैत्य का सिर अपने चक्र से काट दिया था। राहू के अमृतपान की वजह से सिर काटने के बाद वह मरा नहीं अपितु सिर व धड़ दो हिस्सों में विभाजित हो गया। उन्हीं में से नीचे के धड़ को केतू ग्रह के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार केतू ग्रह चंद्र ग्रहण लगाता है। इसे सर्प की पूँछ कहा जाता है। जबकि खगोलशास्त्र में केतू का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। इसे छाया ग्रह कहा जाता है। केतू को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है परंतु केतू धनु राशि में उच्च का व मिथुन राशि में नीच का होता है। यह कुंडली के जिस भाव व जिस राशि में बैठता है उसी के अनुरूप फल देता है। छाया ग्रह होने के बाद भी केतू मानव जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। केतू यदि कुंडली में अच्छे ग्रहों की संगति में शुभ होकर स्थितहो तो जातक को अच्छे फल प्राप्त होते हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार केतू आध्यात्म व मोक्ष का कारक है। शुभ केतू गूढ़-रहस्मयी विद्याओं व तंत्र के अध्ययन में सहायक है। जातक को शोध के कार्य में सफलता प्रदान करता है। केतू धर्म कर्म व ज्योतिषविद्या में रूचि का कारक है।  दूसरी तरफ यही केतू यदि कुंडली में अशुभ हो रहा हो तो जातक को सांसारिक सुखों से दूर कर वैराग्य पैदा करता है। जातक को घर परिवार व रिश्ते नाते अच्छे नहीं लगते। वह अपनो से दूर व अकेला रहना पसंद करता है। जिसके चलते जातक मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है। अशुभ केतू जातक के चंद्रमा के पीड़ित होने का कारण बनता है।

केतू ग्रह के उपाय:-

-कुते को मीठी रोटी खिलाएं।

-कुते की सेवा व पालना करें।

-संतान के साथ सम्बन्ध मधुर बनाएं रखें।

-परनिंदा से बचें।

-केसर का तिलक लगाएं।

0 comment

Related Articles

Leave a Comment