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मंगल क्रोधी या सौम्य

by CKadmin

मंगल, नवग्रह मंडल में से एक हैं। मंगल को युद्ध का देवता भी कहते हैं। मंगल स्वभाव से क्रोधी हैं, इस कारण इनका वर्ण लाल है। इनका वाहन भेड़ हैं।कहा जाता है एक बार भवान शिव कैलाश पर्वत पर समाधि में लीन थे, उस समय उनके ललाट से तीन पसीने की बुँदे पृथ्वी पर गिरी, जिस ने एक सुन्दर बालक को जन्म दिया। उस बालक की चार भुजाएं थी। इस बालक का लालन-पालन पृथ्वी ने किया इस कारण इनको भौम के नाम से भी जाना जाता हैं। भौम ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिस से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने भौम को मंगल लोक प्रदान किया।

ज्योतिष अनुसार मंगल को मेष एवं वृश्चिक राशि का स्वामित्व मिला हैं। मंगल मकर राशि में उच्च के व् कर्क राशि में नीच के माने जाते हैं। नक्षत्रों में मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा में मंगल का अधिकार हैं। इनका तत्व अग्नि, दिशा में दक्षिण और ऋतु में ग्रीष्म ऋतु से सम्बन्ध हैं।

मंगल ग्रह को शारीरिक ऊर्जा, ताकत, क्रोश, वीरता, साहस, रक्त, युद्ध सैनिक, डॉक्टर, लाल सिंदूर, सौफ, अनार, भाई, मित्र आदि का कारक माना जाता हैं।

लाल किताब अनुसार मंगल नेक और बद्ध अर्थात शुभ व् अशुभ दोनों ही प्रकार के होते हैं।मंगल अच्छाई पर चलने वाला ग्रह हैं किन्तु मंगल को अगर बुराई में जाने की प्रेरणा मिले तो मंगल पीछे नहीं हटता और मंगल अशुभ हो जाता हैं।

शनि और राहु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए मंगल देव की पूजा की जाती हैं। यदि मंगल जातक की कुंडली में अच्छी स्थिति में हो तो शनि के बुरे प्रभाव से कुछ हद तक बचा जा सकता हैं। राहु अगर कुंडली में खराब स्थिति में हो तो मंगल की मदद ली जाती हैं, क्योंकि अगर राहुबिगडेल हाथी हैं तो मंगल उस हाथी का महावत जो हाथी को नियन्त्रित करता हैं।

मंगल यदि ख़राब फल दे तो हनुमान जी की पूजा करें, गुड खाएं, भाई ओर मित्र से अच्छे सम्बन्ध रखें, क्रोध ना करें, मसूर दाल का दान करें, बंदरों को गुड-चना खिलायें व् किसी अच्छे ज्योतिष से परामर्श ले कर मूंगा रत्न भी धारण किया जा सकता हैं।

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